बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र, झारखंड पुलिस पर उठाये सवाल

भाजपा विधायक दल के नेता सह पूर्व मुख्यमंत्री बाबू लाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को एक पत्र लिख कर उनका ध्यान झारखंड पुलिस की गैर जिम्मेदारी की तरफ खींचा।

भाजपा विधायक दल के नेता सह पूर्व मुख्यमंत्री बाबू लाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को एक पत्र लिख कर उनका ध्यान झारखंड पुलिस की गैर जिम्मेदारी की तरफ खींचा। उन्होंने कहा कि अपराधियों द्वारा मुख्यमंत्री के आधिकारिक ई-मेल पर जान से मारने की दी गई धमकी के मामले को झारखंड पुलिस द्वारा अति गंभीरता से नहीं लिए जाने और संवेदनहीनता चिन्ता का विषय है। यह एक राज्य के मुखिया की सुरक्षा से जुड़ा हुआ मामला है। अपराधियों ने न केवल आपको और आपके परिवार को बल्कि आपके सहयोगियों तक को नहीं चेतने पर जान से मारने की धमकी देने का दुःस्साहस किया है। परंतु राज्य की पुलिस द्वारा अब तक की जांच-प्रक्रिया पर गौर किया जाए तो ऐसा प्रतीत हो रहा है कि पुलिस द्वारा मामले में केवल खानापूर्ति की जा रही है।

उन्होंने कहा कि समाचार-पत्रों से जो जानकारी प्राप्त हो रही है उसके मुताबिक यह घटना बीते 08 जुलाई का ही बताया जा रहा है। जबकि साइबर थाने में प्राथमिकी 13 जुलाई को दर्ज करने की बात सामने आ रही है। आखिर बीच के 5 दिन मामले में राज्य की पुलिस क्या कर रही थी? क्या मामले को छुपाने का प्रयास किया जा रहा था ? अगर हां, तो किसलिए? अगर नहीं, तो जब मामला 8 जुलाई का ही है तो प्राथमिकी के लिए 5 दिन का इंतजार किसलिए? इस मामले में प्रयुक्त सिस्टम का सर्वर स्विट्जरलैंड और जर्मनी के बताए जा रहे हैं। समाचार पत्रों से मिली जानकारी के अनुसार साइबर थाना रांची से ईमेल कर प्रयुक्त उक्त सर्वर सिस्टम का ब्यौरा मांगना ही अपने आप में हास्यास्पद प्रतीत हो रहा है। राज्य के पुलिस के वरीय अधिकारी इस मामले को लेकर कितने संजीदा हैं? प्रयुक्त सिस्टम का सर्वर स्विट्जरलैंड और जर्मनी का होने के कारण मामला दो विभिन्न देशों के बीच का हो जाता है। ऐसे मामलों के निपटारे, सहयोग व पत्राचार के लिए देश में इंटरपोल की व्यवस्था है।

उन्होंने सुझाव देते हुए कहा कि राज्य के किसी वरीयतम अधिकारी के हवाले से इंटरपोल को लिखित सूचित कर आगे की कार्रवाई के लिए उनका सहयोग लिया जाना चाहिए। आखिर इसका सहयोग क्यों नहीं लिया गया/लिया जा रहा, यह भी एक बड़ा सवाल है? उन्होंने कहा कि कई ऐसी बातें हैं जो इशारा कर रही है कि दाल में कुछ काला है। वैसे भी झारखंड की पुलिस कितनी काबिल है, यह कम-से-कम आपसे तो छिपा नहीं है। उन्होंने कहा कि यह काफी गंभीर मामला है। यह राज्य की मुखिया की सुरक्षा एवं प्रदेश की अस्मिता से जुड़ा मामला है। इसलिए मामले में इंटरपोल का मदद लेना अत्यंत आवश्यक है। ताकि इसमें संलिप्त अपराधियों का चेहरा बिना विलम्ब बेनकाब हो सके और झारखंड ही क्यों देश के किसी भी राज्य में कोई अपराधी पुनः ऐसा दुःस्साहस नहीं कर सके।

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